1“दूसर प दोख लगावइ क आदत जिन डावा काहेकि तोहरे प दोख न लगावा जाइ।
1ܠܐ ܬܕܘܢܘܢ ܕܠܐ ܬܬܕܝܢܘܢ ܀
2काहेकि तोहार निआव उहइ फैसला प टिका होई, जउन फैसला तू दूसर क निआव प दिहे रहा अउर परमेस्सर तोहका उहइ नपना स नापी जउने नपना स तू दूसर क नाप्या ह।
2ܒܕܝܢܐ ܓܝܪ ܕܕܝܢܝܢ ܐܢܬܘܢ ܬܬܕܝܢܘܢ ܘܒܟܝܠܬܐ ܕܡܟܝܠܝܢ ܐܢܬܘܢ ܡܬܬܟܝܠ ܠܟܘܢ ܀
3“तू आपन भाई बंद क आँखी क किरकरी तक क काहे लखत ह जब कि तोहका आपन आँखी क लट्ठा तलक नाहीं देखाइ पड़त?
3ܡܢܐ ܕܝܢ ܚܙܐ ܐܢܬ ܓܠܐ ܕܒܥܝܢܗ ܕܐܚܘܟ ܘܩܪܝܬܐ ܕܒܥܝܢܟ ܠܐ ܒܚܪ ܐܢܬ ܀
4जबहिं तोहरे आँखी मँ लट्ठा बाटइ तब तू आपन भाई स कइसे कहि सकत ह, “तू मोका तोहरी आँखी क किरकिरी निकारइ द्या।”
4ܐܘ ܐܝܟܢܐ ܐܡܪ ܐܢܬ ܠܐܚܘܟ ܫܒܘܩ ܐܦܩ ܓܠܐ ܡܢ ܥܝܢܟ ܘܗܐ ܩܪܝܬܐ ܒܥܝܢܟ ܀
5अरे कपटी! पहिले आपन आँखी क लट्ठा निकार, फिन तू नीक नीक देख पउब्या अउर आपन भाई क आँखी क किरकिरी निकार पउब्या।
5ܢܤܒ ܒܐܦܐ ܐܦܩ ܠܘܩܕܡ ܩܪܝܬܐ ܡܢ ܥܝܢܟ ܘܗܝܕܝܢ ܢܬܒܚܪ ܠܟ ܠܡܦܩܘ ܓܠܐ ܡܢ ܥܝܢܗ ܕܐܚܘܟ ܀
6“कूकुरन क पवित्तर चीज जिन द्या अउर सुअरन क अगवा मोती जिन बिखरावा। नाहीं तउ उ पचे आपन गोड़ी क तले रौदिहइँ अउर कूकुरन पलटि क तोहरे ऊपर चढ़ी बैठिहीं।
6ܠܐ ܬܬܠܘܢ ܩܘܕܫܐ ܠܟܠܒܐ ܘܠܐ ܬܪܡܘܢ ܡܪܓܢܝܬܟܘܢ ܩܕܡ ܚܙܝܪܐ ܕܠܡܐ ܢܕܘܫܘܢ ܐܢܝܢ ܒܪܓܠܝܗܘܢ ܘܢܗܦܟܘܢ ܢܒܙܥܘܢܟܘܢ ܀
7“परमेस्सर स माँगत रहा, तोहका दीन्ह जाइ। खोजत रहा, तोहका मिली। खटखटावत रहा, तोहरे बरे दरवाजा खोलि दीन्ह जाई।
7ܫܐܠܘ ܘܢܬܝܗܒ ܠܟܘܢ ܒܥܘ ܘܬܫܟܚܘܢ ܩܘܫܘ ܘܢܬܦܬܚ ܠܟܘܢ ܀
8काहेकि हर कउनो जउन माँगत ह, पावत ह। जउन ढूँढत ह, पावत ह। जउन खटखटावत रहत ह ओकर बरे दरवाजा खोलि दीन्ह जाई।
8ܟܠ ܓܝܪ ܕܫܐܠ ܢܤܒ ܘܕܒܥܐ ܡܫܟܚ ܘܠܐܝܢܐ ܕܢܩܫ ܡܬܦܬܚ ܠܗ ܀
9“तू सबन मँ स अइसा बाप कउन सा अहइ जेकर बेटवा रोटी माँगइ अउर उ बेटवा क पाथर देइ?
9ܐܘ ܡܢܘ ܡܢܟܘܢ ܓܒܪܐ ܕܢܫܐܠܝܘܗܝ ܒܪܗ ܠܚܡܐ ܠܡܐ ܟܐܦܐ ܡܘܫܛ ܠܗ ܀
10या जब उ मछरी माँगइ तउ उ ओका साँप दइ देइ। बतावा का कउनो देई? अइसा कउनो न करी।
10ܘܐܢ ܢܘܢܐ ܢܫܐܠܝܘܗܝ ܠܡܐ ܚܘܝܐ ܡܘܫܛ ܠܗ ܀
11एह बरे चाहे तू बुरा काहे न ह्वा, जानत ह कि आपन गदेलन क नीक भेंट कइसे दीन्ह जात ही। वइसे हीं सचमुच सरगे क बसइया तोहार परमपिता माँगइवालन क नीक नीक चीचन्क जरूर देइ।
11ܘܐܢ ܗܟܝܠ ܐܢܬܘܢ ܕܒܝܫܐ ܐܢܬܘܢ ܝܕܥܝܢ ܐܢܬܘܢ ܡܘܗܒܬܐ ܛܒܬܐ ܠܡܬܠ ܠܒܢܝܟܘܢ ܟܡܐ ܝܬܝܪܐܝܬ ܐܒܘܟܘܢ ܕܒܫܡܝܐ ܢܬܠ ܛܒܬܐ ܠܐܝܠܝܢ ܕܫܐܠܝܢ ܠܗ ܀
12“एह बरे जइसा बेवहार आपन बरे तू दूसर लोगन्स चाहत ह, वइसा बेवहार तू भी ओनसे करा। यही मूसा क व्यवस्था अउर नबियन दुआरा बतावा गवा बा।
12ܟܠ ܡܐ ܕܨܒܝܢ ܐܢܬܘܢ ܕܢܥܒܕܘܢ ܠܟܘܢ ܒܢܝ ܐܢܫܐ ܗܟܢܐ ܐܦ ܐܢܬܘܢ ܥܒܕܘ ܠܗܘܢ ܗܢܘ ܓܝܪ ܢܡܘܤܐ ܘܢܒܝܐ ܀
13“सँकरे राह स घुसा! इ मइँ तोहका यह बरे कहत हउँ काहेकि चौड़ा दुआर अउर बड़की राह तउ बिनासे कइँती लइ जात ह। बहोत स मनई उ राहे प चलत हीं।
13ܥܘܠܘ ܒܬܪܥܐ ܐܠܝܨܐ ܕܦܬܐ ܗܘ ܬܪܥܐ ܘܐܪܘܝܚܐ ܐܘܪܚܐ ܐܝܕܐ ܕܡܘܒܠܐ ܠܐܒܕܢܐ ܘܤܓܝܐܐ ܐܢܘܢ ܐܝܠܝܢ ܕܐܙܠܝܢ ܒܗ ܀
14मुला केतॅना सँकरा अहइ उ दुआर अउर केतॅना छोटकी अहइ उ राह जउन जिन्नगी कइँती लइ जात ही अउर कठिन अहइँ उ सबइ मनइयन जउन ओका पावत अहइँ।
14ܡܐ ܩܛܝܢ ܬܪܥܐ ܘܐܠܝܨܐ ܐܘܪܚܐ ܕܡܘܒܠܐ ܠܚܝܐ ܘܙܥܘܪܐ ܐܢܘܢ ܐܝܠܝܢ ܕܡܫܟܚܝܢ ܠܗ ܀
15“झूठे नबियन स होसियार रहा। उ पचे तोहरे लगे निर्छल भेड़िन क भेस मँ आवत हीं मुला भीतर उ सबइ खूँखार बड़का कूकुर होत हीं।
15ܐܙܕܗܪܘ ܡܢ ܢܒܝܐ ܕܓܠܐ ܕܐܬܝܢ ܠܘܬܟܘܢ ܒܠܒܘܫܐ ܕܐܡܪܐ ܡܢ ܠܓܘ ܕܝܢ ܐܝܬܝܗܘܢ ܕܐܒܐ ܚܛܘܦܐ ܀
16तू ओनके करमन क फल स पहिचान लेब्या। कउनो कँटेहरी झाड़ी स न तउ अंगूर एकट्ठा कइ पावत ही अउ न गोखरु स अंजीर।
16ܡܢ ܦܐܪܝܗܘܢ ܕܝܢ ܬܕܥܘܢ ܐܢܘܢ ܠܡܐ ܠܩܛܝܢ ܡܢ ܟܘܒܐ ܥܢܒܐ ܐܘ ܡܢ ܩܘܪܛܒܐ ܬܐܢܐ ܀
17अइसे ही बड़िया बिरवा प नीक फल लागत हीं मुला बेकार बिरवा प बेकार फल लागत हीं।
17ܗܟܢܐ ܟܠ ܐܝܠܢܐ ܛܒܐ ܦܐܪܐ ܫܦܝܪܐ ܥܒܕ ܐܝܠܢܐ ܕܝܢ ܒܝܫܐ ܦܐܪܐ ܒܝܫܐ ܥܒܕ ܀
18एक नीक बिरवा बुरे फल नाहीं पइदा करत अउर न कउनो बेकार बिरवा नीक फल पइदा कइ सकत ह।
18ܠܐ ܡܫܟܚ ܐܝܠܢܐ ܛܒܐ ܦܐܪܐ ܒܝܫܐ ܠܡܥܒܕ ܘܠܐ ܐܝܠܢܐ ܒܝܫܐ ܦܐܪܐ ܛܒܐ ܠܡܥܒܕ ܀
19हर उ बिरवा जेह प नीक फल नाहीं लगतेन, ओका काटि के आगी मँ झोकि दीन्ह जात ह।
19ܟܠ ܐܝܠܢܐ ܕܠܐ ܥܒܕ ܦܐܪܐ ܛܒܐ ܡܬܦܤܩ ܘܒܢܘܪܐ ܢܦܠ ܀
20एह बरे मइँ तू सबन क दुबारा कहत हउँ कि उ लोगन क तू ओनके करमन क फले स पहिचान लेब्या।
20ܡܕܝܢ ܡܢ ܦܐܪܝܗܘܢ ܬܕܥܘܢ ܐܢܘܢ ܀
21पर्भू, पर्भू कहइवाला हर मनई सरगे क राज्य मँ घुस न पाई मुला उहइ सरग जउन सरगे मँ बसा अहइ मोरे परमपिता क इच्छा प चलत ह उहइ ओहमाँ घुसि पाई।
21ܠܐ ܗܘܐ ܟܠ ܕܐܡܪ ܠܝ ܡܪܝ ܡܪܝ ܥܐܠ ܠܡܠܟܘܬܐ ܕܫܡܝܐ ܐܠܐ ܡܢ ܕܥܒܕ ܨܒܝܢܗ ܕܐܒܝ ܕܒܫܡܝܐ ܀
22उ आखिरी दिना मँ बहोत स मनई मोसे पुछिहीं, ‘पर्भू! पर्भू! का हम तोहरे नाउँ स भविस्सबाणी नाहीं कीन्ह का तोहरे नाउँ स हम सबन दुस्ट आतिमन क नाहीं निकारा अउर का हम पचे तोहरे नाउँ स अद्भुत कारजन नाहीं कीन्ह
22ܤܓܝܐܐ ܢܐܡܪܘܢ ܠܝ ܒܗܘ ܝܘܡܐ ܡܪܝ ܡܪܝ ܠܐ ܒܫܡܟ ܐܬܢܒܝܢ ܘܒܫܡܟ ܫܐܕܐ ܐܦܩܢ ܘܒܫܡܟ ܚܝܠܐ ܤܓܝܐܐ ܥܒܕܢ ܀
23तबहिं मइँ ओनसे साफ साफ कहियउँ कि मइँ तू सबन्क नाहीं जानत हउँ, ‘हे कुकरमी मनइयो! हियाँ स भागि जा।’
23ܘܗܝܕܝܢ ܐܘܕܐ ܠܗܘܢ ܕܡܢ ܡܬܘܡ ܠܐ ܝܕܥܬܟܘܢ ܐܪܚܩܘ ܠܟܘܢ ܡܢܝ ܦܠܚܝ ܥܘܠܐ ܀
24“यह बरे जउन मोर सब्दन क सुनत ह अउर उ एन प चलत ह ओकर तुलना उ बुद्धिमान स कीन्ह जाई जउन आपन घर चट्टाने प बनएस।
24ܟܠ ܗܟܝܠ ܕܫܡܥ ܡܠܝ ܗܠܝܢ ܘܥܒܕ ܠܗܝܢ ܢܬܕܡܐ ܠܓܒܪܐ ܚܟܝܡܐ ܗܘ ܕܒܢܐ ܒܝܬܗ ܥܠ ܫܘܥܐ ܀
25बरखा भइ, बाढ़ आइ, आँधी चली अउइ सबई उ घरे स टक्कराइ गएन, मुला घर गिरा नाहीं। काहेकि ओकर नेंव चट्टाने प घरी गइ रही।
25ܘܢܚܬ ܡܛܪܐ ܘܐܬܘ ܢܗܪܘܬܐ ܘܢܫܒ ܪܘܚܐ ܘܐܬܛܪܝܘ ܒܗ ܒܒܝܬܐ ܗܘ ܘܠܐ ܢܦܠ ܫܬܐܤܘܗܝ ܓܝܪ ܥܠ ܫܘܥܐ ܤܝܡܢ ܗܘܝ ܀
26मुला उ जउन मोरे सब्दन क सुनत ह मुला ओन प चलत नाहीं, उ मूर्ख मनई क नाईं अहइ जउन आपन घर रेते प बनाएस।
26ܘܟܠ ܡܢ ܕܫܡܥ ܡܠܝ ܗܠܝܢ ܘܠܐ ܥܒܕ ܠܗܝܢ ܢܬܕܡܐ ܠܓܒܪܐ ܤܟܠܐ ܕܒܢܐ ܒܝܬܗ ܥܠ ܚܠܐ ܀
27बरखा भइ, बाढ़ आइ अउर आँधी चली अउर उ घरे स टकराइ गएन, जेहसे उ घर आवाज कइके समूचइ गिर गवा।”
27ܘܢܚܬ ܡܛܪܐ ܘܐܬܘ ܢܗܪܘܬܐ ܘܢܫܒ ܪܘܚܐ ܘܐܬܛܪܝܘ ܒܒܝܬܐ ܗܘ ܘܢܦܠ ܘܗܘܬ ܡܦܘܠܬܗ ܪܒܐ ܀
28नतीजा इ भवा कि जबहिं ईसू इ बतियन क कहिके पूरी किहेस, तउ ओकरे उपदेसन प भीड़ क लोगन क अचरज भवा।
28ܘܗܘܐ ܕܟܕ ܫܠܡ ܝܫܘܥ ܡܠܐ ܗܠܝܢ ܬܗܝܪܝܢ ܗܘܘ ܟܢܫܐ ܥܠ ܝܘܠܦܢܗ ܀ 29 ܡܠܦ ܗܘܐ ܠܗܘܢ ܓܝܪ ܐܝܟ ܡܫܠܛܐ ܘܠܐ ܐܝܟ ܤܦܪܝܗܘܢ ܘܦܪܝܫܐ ܀
29काहेकि उ धरम सास्तिरियन क नाईं नाहीं मुला एक अधिकारी क नाईं उपदेस देत रहा।
29